Sunday, August 15, 2010

jajba

जजबा
तुम मिटा दो बेशक
मन्दीरों को
मसजिदो को
चचोँ को
इमारतो को
हम फिर से
बना लेगे इसे
वक्त के साथ
सजा लेगे इसे
पर
कैसे मिटा पाओगे
उस जुनुन को
जो हमारे लहू मे है
जिसका एक कौम है
उस जज्बे को
जो 100 करोर दिलों में
घङकता है
और कहता है
" हिन्दुस्तान "
तुझे सलाम
-अमित शंकर

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