जजबा
तुम मिटा दो बेशक
मन्दीरों को
मसजिदो को
चचोँ को
इमारतो को
हम फिर से
बना लेगे इसे
वक्त के साथ
सजा लेगे इसे
पर
कैसे मिटा पाओगे
उस जुनुन को
जो हमारे लहू मे है
जिसका एक कौम है
उस जज्बे को
जो 100 करोर दिलों में
घङकता है
और कहता है
" हिन्दुस्तान "
तुझे सलाम
-अमित शंकर
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